बारिश!

बारिश!
मौसम की पहली बारिश!
कहते हैं सबका नज़रिया अलग होता है। “Beauty lies in the eyes of beholder”
नज़रिये तय करते हैं दृश्य की सुंदरता या कुरूपता। आखिर हैं तो सब कुदरत के ही करिश्मे। करिश्मा! नज़रों का? शायद नज़रिये का !
जो बूदें बादलों से उपज कर किसी की फसलें उपजाती हैं। वही शायद बालकनी में किसी को सुकूं परोस जाती हैं। कभी कोई यादें, कई वादें यूँ ही। खैर, कि हमें बारिश से मोहब्बत तो नही। पर हाँ, बूँदें जब ठहर जाती हैं पंखुड़ियों पर, पत्तों पर, या बालकनी की रेलिंग पर, तो वो खूबसूरत होती हैं। क्यूंकि ठहर जाना  मेरे नज़रिये से खुबसूरत है। और नज़रिये अपने होते हैं। अलग हो सकते हैं।

बारिश!

बारिश!
मौसम की पहली बारिश!
कहते हैं सबका नज़रिया अलग होता है। “Beauty lies in the eyes of beholder”
नज़रिये तय करते हैं दृश्य की सुंदरता या कुरूपता। आखिर हैं तो सब कुदरत के ही करिश्मे। करिश्मा! नज़रों का? शायद नज़रिये का !
जो बूदें बादलों से उपज कर किसी की फसलें उपजाती हैं। वही शायद बालकनी में किसी को सुकूं परोस जाती हैं। कभी कोई यादें, कई वादें यूँ ही। खैर, कि हमें बारिश से मोहब्बत तो नही। पर हाँ, बूँदें जब ठहर जाती हैं पंखुड़ियों पर, पत्तों पर, या बालकनी की रेलिंग पर, तो वो खूबसूरत होती हैं। क्यूंकि ठहर जाना  मेरे नज़रिये से खुबसूरत है। और नज़रिये अपने होते हैं। अलग हो सकते हैं।

क्रम

इश्क़,किताबें,फिर किताबों से इश्क़।


अनुराग,
वैराग,
फिर वैराग से अनुराग।

मान्यत: यह बस एक क्रम है जो निरंतर चलता जाता है। और इस निरन्तरता के अधीन स्थायी रहती हैं – पंखुड़ियाँ ।
कभी हाथों में तो कभी किन्हीं सफ़हों के तले ।

नज़्म

लोग लिखते हैं
अमलतास के फूलों पर
तो कभी गुलमोहर के
दरख़्तों पर
इनके लाल-पीले रंग
मोहित कर,
उतर जाते हैं
कविता कहानियों वाले
कैनवस पर
पर
वो मिट्टी इन्हें
खुद में बो कर
उगा कर
खिला कर
झड़ कर
बिखरने पर
समेट लेती है
खुद में…
बिना अपना वजूद जताए।

#hindipoems #nazm #hindikavita #diarysnaps